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संभोग के प्रति स्त्रियों की उपेक्षा- sambhog ke prati striyo ki Upeksha

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किसी भी पति और पत्नी को अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए जरूरी है कि उनके बीच सेक्स संबंध भी अच्छे हो। जहां भी पति और पत्नी के बीच बनने वाले सेक्स संबंध संतुष्टि देने वाले होते हैं वहां पर ही पति और पत्नी के बीच प्रेम संबंधों में मजबूती आती है। ठीक इसके विपरीत अगर पति-पत्नी के बीच बनने वाले संबंध दोनों को संतुष्टि देने वाले नहीं होते तो उनके बीच में कड़वाहट पैदा हो जाती है और इन संबंधों को अगर समय रहते नहीं संभाला जाता तो यह तलाक का कारण बन जाता है। इसलिए सेक्स संबंधों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। कभी-कभी सेक्स संबंधों में गतिरोध उत्पन्न हो जाता है जोकि खतरनाक साबित होता है। यह अवरोध पति के अंदर की यौन दु्र्बलता के कारण हो सकता है जिसके कारण वह अपनी पत्नी को सेक्स के रूप में पूरी तरह संतुष्टि नहीं दे पाता और यही अवरोध पत्नी के कारण भी पैदा हो सकता है जो कामशीलता के रूप में दिखाई देता है जिसके अंतर्गत पत्नी की रुचि सेक्स संबंधों के प्रति कम होती जाती है। सेक्स संबंधों में अरुचि होना या उपेक्षा का भाव सेक्स संबंधों से मिलने वाले आनंद को दूर कर देता है। इस स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए।
सेक्स संबंधों में पूरी तरह आनंद और संतुष्टि प्राप्त करने के लिए पति और पत्नी को ही पूरी तरह योगदान देना चाहिए। पुरुष हर समय सेक्स संबंध बनाने के लिए तैयार रहता है लेकिन स्त्रियों में कई बार सेक्स संबंधों को लेकर अरुचि पैदा हो जाती है। वह अपने आपको दिमागी और शारीरिक रूप से इन संबंधों के लिए तुरंत तैयार नहीं कर पाती। पुरुष स्त्रियों की इन भावनाओं को अनदेखा करके उसके साथ जबर्दस्ती सेक्स संबंध बनाने लगता है। इसलिए सुखी और स्वस्थ संबंधों के लिए यह जरूरी है कि स्त्री और पुरुष दोनों ही शारीरिक तथा मानसिक रूप से पूरी तरह उमंग के साथ इसमें लीन हो।
सेक्स शास्त्रियों का मानना है कि सेक्स क्रिया में स्त्री का योगदान खास मायने रखता है क्योंकि पुरुष को वीर्यपात होते ही चरम सुख की अनुभूति हो जाती है लेकिन स्त्री के लिए चरम सुख की प्राप्ति इतनी सरल और सहज नहीं होती है। पुरुष सेक्स करने के लिए हर समय तैयार रहता है जबकि स्त्री को इसके लिए तैयार होने में कुछ समय लगता है। बहुत से मौकों पर पुरुष को स्त्री को तैयार भी करना होता है। इसलिए सेक्स संबंधों को जीवंत बनाए रखने में स्त्री की खास भूमिका होती है। हमारे यहां की सभ्यता, संस्कृति और मर्यादाओं के चलते काफी लंबे समय तक सेक्स संबंधों के दौरान स्त्री के सहयोग को स्वीकार ही नहीं किया गया था। उसका सहयोग सेक्स संबंधों के समय खामोशी के साथ समर्पण तक ही सीमित था। उसे सिर्फ पुरुष की यौन उत्तेजना को शांत करने का साधन समझा जाता था। स्त्री को सेक्स संबंधों में संतुष्टि मिली है या नहीं इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता था। कभी किसी खास मौके पर अगर सेक्स संबंधों के लिए पहल करती थी तो उसके चरित्र पर ही शक किया जाता था।
लेकिन धीरे-धीरे समय बदला, लोगों के बर्ताव और विचारों में खुलापन आने लगा, भारतीय़ लोगों पर पश्चिमी संस्कृति का असर पड़ने लगा तो स्त्रियों की चेतना भी सेक्स संबंधों के प्रति जागने लगी। स्त्रियों के मन में पुरुष को आनंद प्राप्त कराने के साथ-साथ स्वयं भी आनंद पाने की इच्छा बढ़ने लगी। सेक्स संबंधों में स्त्री को भी चरम सुख प्राप्त हो इसके लिए पुरुष का इस क्रिया के लिए पूरी तरह सक्षम होना जरूरी है। लेकिन इस क्रिया के लिए बहुत से पुरुषों में यौन दुर्बलता रुकावट बनने लगी है। एक स्त्री किसी भी स्थिति में पुरुष को पूर्ण संतुष्ट कर सकती है लेकिन पुरुष के साथ यह बात ठीक नहीं बैठती। उसे सेक्स संबंध बनाने के लिए अपने आप में पूर्णता प्राप्त करने की क्षमता पैदा करनी ही होती है। वर्तमान में यह इसलिए भी जरूरी हो गया है कि स्त्री पहले की अपेक्षा सेक्स संबंधों के बारे में ज्यादा सजग हो गई है। यदि स्त्री को काफी समय तक अपने पति से सेक्स संबंधों में संतुष्टि प्राप्त नहीं होता तो वह विरोध पर उतर जाती है।
पुरुषों को भी बदलते समय को दिमाग में रखकर खुद को इस नई स्थिति का सामना करना ही पड़ेगा। जबसे पति-पत्नी में एक या दो बच्चे पैदा करने की सोच आई है तबसे शरीर संबंधों का महत्व बढ़ गया है। सेक्स संबंध पूरी तरह से पुरुष और स्त्री का व्यक्तित्व मामला है। वैसे तो इसमें आई रुकावट को दूर करने की जिम्मेदारी स्त्री और पुरुष दोनों पर ही आती है लेकिन फिर भी इसको लेकर पुरुष ज्यादा प्रेशर में रहता है। सेक्स संबंधों में सक्षम न होना कोई इस तरह की समस्या नहीं है कि जिसका पता पुरुष को न हो या वह इसके बारे में समझता न हो, यह बात अलग है कि वह सब कुछ जानते समझते हुए भी इससे अंजान बनने की कोशिश करता है क्योंकि स्खलन के साथ ही उसकी कामोत्तेजना तो समाप्त हो जाती है लेकिन उसकी कमजोरी या समस्या का असर सिर्फ स्त्री पर ही पड़ता है।
वर्तमान समय में हर आदमी अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त जीवन जी रहा है। इसमें से एक समस्या जो तेजी से फैल रही है वह है यौन दुर्बलता। अगर किसी व्यक्ति को यह समस्या होती है तो वह शर्म, संकोच या झिझक के मारे किसी को अपनी इस समस्या के बारे में बता नहीं पाता है। दूसरों को बताने की बात तो दूसरी है वह अपनी इस समस्या के बारे में अपनी पत्नी को भी बताने से डरता है क्योंकि उसे लगता है कि इस बारे में बताने से वह उसकी नजरों में गिर सकता है। पुरुष की यह सोच बिल्कुल गलत है लेकिन यह समस्या अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो स्थिति और भी घातक हो सकती है। समस्या चाहे छोटी हो या बड़ी उसके बारे में लापरवाही न करके तुरंत ही इलाज करवाना चाहिए।
यहां पर एक बात पर ध्यान देना और भी जरूरी है कि स्त्रियों की काम संतुष्टि के बारे में पुरुष की मानसिकता आज भी पहले की ही तरह ही है। उनका मानना है कि पुरुष देने वाला है और स्त्री लेने वाली है इसलिए स्त्रियों को जितना मिलता है उतने में ही संतुष्ट हो जाना चाहिए। लेकिन जो पुरुष शारीरिक संबंधों में स्त्री की संतुष्टि की उपेक्षा करते हैं उन्हें आगे चलकर बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी पुरुषों की पत्नियां आगे चलकर पराए पुरुष के चक्कर में पड़ जाती हैं। ऐसे बहुत से मामले या केस आदि हमें अपने आसपास ही देखने को या पढ़ने को मिल जाते हैं जिसमें किसी पति ने अपनी पत्नी को किसी और पुरुष के साथ पकड़ लिया या अवैध संबंधों के चक्कर में किसी पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। लेकिन यह सब इसलिए ही होता है क्योंकि इन मामलों में पतियों में कभी अपनी पत्नी की शारीरिक तृप्ति की ओर ध्यान ही नहीं दिया जिसके कारण पत्नी को अपने शरीर की संतुष्टि के लिए दूसरे पुऱुषों का सहारा लेना पड़ा। इसलिए अगर पुरुष को अपना दाम्पत्य जीवन सुख और शांति से बिताना है तो उसे शारीरिक संबंधों में स्त्री की संतुष्टि का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।

पत्नियों के लिए कुछ महत्वपू्र्ण बातें
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परिचय-
जिस परिवार में पति और पत्नी के बीच अथाह प्यार होता है, घर में सुख-शांति होती है, एक-दूसरे पर भरोसा होता है, उसी घर को असल में आदर्श परिवार कहा जाता है और वहीं हर तरह की सुख-समृद्धि मिलती है। लेकिन उसके लिए पति और पत्नी दोनों को ही मिलकर कोशिश करनी चाहिए। एक पूरे परिवार को ठीक प्रकार और अनुशासन से चलाने की जिम्मेदारी पत्नी पर ही होती है इसमें वह अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती है तो पूरा परिवार टूटकर बिखर जाता है।
ससुराल में तालमेल बैठाने की कोशिश करें-
विवाह के तुरंत बाद ही स्त्री को पत्नी के रूप में एक नए परिवार और नए माहौल में जाना पड़ता है। ससुराल में स्त्री को अपने पति के साथ-साथ सास-ससुर, ननद-जेठानी, देवर-देवरानी आदि के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है।
बहुत सी स्त्रियां होती हैं जो शादी के बाद अपने ससुराल वालों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती हैं क्योंकि ससुराल वालों की उसको लेकर जितनी अपेक्षाएं होती हैं वह उन पर खरी नहीं उतर पाती है। स्त्री को ससुराल में सास-ससुर के रूप में एक तरह से मां-बाप ही मिलते हैं। इसलिए उनकी सही तरह से देखभाल और मान-सम्मान बनाए रखना उसी की जिम्मेदारी होती है। बहुत सी सास सख्त स्वभाव की होती हैं लेकिन अगर बहू चाहे तो अपने अच्छे व्यवहार से तथा मीठी बोली से पत्थर दिल सास को भी मोम की बना सकती है। जिन बहुओं को इस तरीके से अपनी सास का दिल जीतना आता है उन्हें ही ससुराल में ज्यादा प्यार मिलता है। अगर ससुराल में कभी सास या ससुर कुछ गलती होने पर या न भी होने पर डांट देते हैं तो उन्हें पलटकर जवाब नहीं देना चाहिए क्योंकि पहले घर में मां-बाप भी तो छोटी-छोटी बातों पर डांट देते थे। पति भी जब देखता है कि मेरी पत्नी मेरे घर वालों का कितना सम्मान करती है तो उसके दिल में भी अपनी पत्नी के लिए प्यार और सम्मान बढ़ जाता है। इसलिए हर स्त्री को चाहिए कि वे अपने ससुराल में अपने व्यवहार को अच्छा बनाकर ससुराल वालों का दिल जीतने की कोशिश करें। ऐसे घरों में हमेशा सुख और शांति बनी रहती है।
ससुराल के सदस्यों को अपना समझना-
अक्सर स्त्री का ससुराल में अपनी ननदों के प्रति प्यार कुछ कम ही होता है। जब तक ननद की शादी नहीं होती तो उन दोनों की किसी न किसी बात पर बहस आदि होती ही रहती है। शादी होने के बाद भी जब ननद अपने घर आती है तो स्त्री थोड़े ही दिनों में उसे बोझ समझने लगती है और उसकी सही तरह से आवभगत नहीं करती। सास भी कभी यह बर्दाश्त नहीं कर पाती कि उसकी बहू उसकी बेटी के साथ गलत व्यवहार करे। इसी कारण से बहुत से घरों में क्लेश का माहौल बन जाता है। इसलिए हर बहू का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपनी ननदों से अपनी बहनों जैसा ही बर्ताव करे और उन्हें वैसा ही मान-सम्मान दें।
ससुराल के हर काम में भाग लें-
ससुराल में जैसे ही कोई शादी-ब्याह या फंक्शन आदि हो जैसे कि ननद की शादी, देवर की शादी या कोई और प्रोग्राम तो उस घर की बहू को उसमें बढ़-चढ़कर काम करना चाहिए। बहुत सी स्त्रियां होती हैं जो ऐसे समय किसी न किसी रोग का बहाना बनाकर काम से बचने का प्रयास करती हैं। लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि अगर वह काम से बचने के लिए इस तरह के बहाने आदि बनाती हैं तो इससे उनका कोई नाम नहीं होता बल्कि लोग तो यही कहते हैं कि काम से बचने के लिए बहाना बनाकर पड़ी है। वैसे तो कुछ भी काम हो जो होने होते हैं वे शुरू भी होते हैं और खत्म भी होते हैं। बाद में सिर्फ इतना ही रह जाता है कि किसने कितना काम किया और किसने कामचोरी की। इसलिए हर बहू को यह समझना जरूरी है की ससुराल को भी अपना घर समझें और उसमें होने वाले कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
घर की बातें बाहर फैलाना-
बहुत सी बहुओं की आदत होती हैं कि उनके घर में कोई भी छोटी-मोटी बात या लड़ाई-झगड़ा होता है तो वह तुरंत ही अपने आस-पड़ोस में रहने वाली स्त्रियों को बता देती हैं। पड़ोस की औरतें भी बहू के द्वारा कही जाने वाली बातों को उसकी सास को 2 की 4 लगाकर बता देती हैं जिससे अगर छोटा झगड़ा भी होगा तो वह भी बड़े झगड़े में तब्दील हो जाता है। इससे सास और बहू के रिश्तों में और भी खटास पड़ जाती है। असल में कोई घर ऐसा नहीं होता जहां पर कि छोटे-मोटे झगड़े नहीं होते हैं लेकिन घर के इन झगड़ों को बाहर ले जाना किसी लिहाज से उचित नहीं है। अगर आप अपने पड़ोस के लोगों को कुछ बताते हैं तो वह उन्हें सुलझाने की बजाय मजे ही लेंगे। इसलिए घर की बातों को अगर घर में ही सुलझा लिया जाए तो अच्छा है। यहां तक कि बहू को अपने घर की किसी भी बात को अपने मायके वालों को बताने से भी बचना चाहिए।
सेक्स संबंधों में संतुलन-
घर वालों के साथ अपने संबंधों को मधुर बनाने के साथ ही एक प्रकार के संबंध और हैं जिन्हें भी अगर मधुर बनाकर रखा जाए तो जिंदगी में फिर किसी प्रकार की परेशानी आने की कोई आशंका नहीं होती है और वह है पति और पत्नी के बीच बनने वाले सेक्स संबंध। पति-पत्नी को एक-दूसरे के नजदीक लाने के लिए तथा प्यार को बढ़ाने के लिए सेक्स एक बहुत ही महत्वपूर्ण काम करता है। इन संबंधों में पत्नी को भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, तभी यह संबंध सफल बनते हैं। बहुत सी स्त्रियां होती है जो बच्चे को जन्म देने के बाद सेक्स से ऐसे कटने लगती है जैसे कि सेक्स सिर्फ बच्चे को पैदा करने के लिए ही किया जाता है। सेक्स एक ऐसी भूख है जो व्यक्ति को हमेशा ही लगती रहती है। विद्वानों के अनुसार जोश और उमंग से भरे सेक्स संबंध व्यक्ति की ऊर्जा शक्ति को बनाए रखते हैं और उसे हर तरह की परिस्थिति से लड़ने की ताकत प्रदान करते हैं।
हर पत्नी के लिए इस बात को समझना जरूरी है कि बच्चे पैदा हो जाने से या बड़े हो जाने से शारीरिक संबंधों की जरूरत समाप्त नहीं हो जाती है। पेट की भूख हो या सेक्स की, दोनों ही व्यक्ति के साथ आखिरी समय तक रहती है। कभी भी किसी ग्रंथ में या किसी और में यह बात कभी भी नहीं की गई कि बच्चे के जन्म के बाद सेक्स करना बेकार है। सफल सेक्स संबंध व्यक्ति के दिमाग की परेशानियों को समाप्त कर देते हैं। इसलिए पति के साथ इस क्रिया में ज्यादा से ज्यादा सहयोग प्रदान करने की कोशिश करें।
सेक्स संबंधों के समय इधर-उधर की बातें-
बहुत सी स्त्रियां होती है कि वह जब अपने पति के साथ सेक्स क्रिया में लीन होती हैं तब भी घर की या बाहर की बातें छेड़ देती हैं। उन्हें लगता है कि वैसे तो उसे अपने पति से बात करने का पूरा मौका नहीं मिल पाता तो क्यों न अभी कर ली जाए। पति सोचता है कि उसकी पत्नी उसके साथ इस क्रिया में ध्यान दें लेकिन वह होती है कि कहां-कहां की बातें लेकर बैठ जाती है। इस कारण पति जो आनंद लेना चाहता है चाहकर भी वह नहीं ले पाता है।
इस बारे में पत्नियों को सोचना चाहिए कि सेक्स संबंध बनाते समय ऐसी बातें करें जो उनकी और पति की उत्तेजना को और बढ़ाएं न कि ऐसी जिनसे कि इस क्रिया में मन ही न लगे। अगर पत्नी को पति से किसी जरूरी बात को करने का समय नहीं मिल पाता है तो संबंध बनाने से पहले ही इन बातों को निपटा लें। वैसे भी बच्चे के पैदा होने के बाद रोजाना सेक्स संबंध बनाना मुश्किल हो जाता है तब तो इसके लिए सप्ताह में कभी-कभार ही समय मिल पाता है। ऐसे में अगर सेक्स संबंध बनाते समय भी घर-गृहस्थी की समस्याओं के बारे में बात की जाती है तो पति का मूड इससे खराब हो सकता है। इसके लिए पत्नी को ऐसे समय में बेकार की बातों में न पड़कर सेक्स क्रिया में ही ध्यान लगाना चाहिए क्योंकि सेक्स ऐसी क्रिया है जिसका आनंद पति और पत्नी दोनों को ही बराबर रूप में मिलता है।
पति पर शक करना-
आज के समय में आफिस आदि में स्त्रियां और पुरुष साथ-साथ मिलकर काम करते हैं। लेकिन बहुत सी पत्नियों की आदत होती है कि अगर उनका पति किसी लड़की के साथ काम करता है तो वह हर वक्त उस पर शक करती रहती हैं। ऐसे में अगर पति कभी घर पर देर से आता है तो पत्नी को लगता है कि उसका पति उसके साथ काम करने वाली लड़की के साथ घूम रहा होगा। पति जब घर पर आता है तो वह उसको ताने मारने लगती है। इसी कारण से उनके बीच में अक्सर झगड़े होते रहते हैं। असल में पत्नियों के शक के पीछे कोई खास कारण न हो फिर भी वह अपने ही मन से पति से ऊपर शक करती रहती है।
इसके लिए सारी पत्नियों को यह बताना जरूरी है कि उन्हें अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास रखना चाहिए। अगर कुछ पुरुष अपनी पत्नियों के साथ धोखा करके किसी और लड़की के साथ संबंध बनाते हैं तो ऐसा जरूरी नहीं है कि सारे पति ही ऐसे हो। एक छोटा सा शक हंसते-खेलते घर को बर्बाद कर सकता है।
दूसरी स्त्रियों से बराबरी करना-
बहुत सी स्त्रियों की आदत होती है कि उनकी पड़ोसन अगर कोई गहना या साड़ी आदि खरीदकर लाती है तो वह भी उनकी देखादेखी अपने पति से वैसी ही चीजों की मांग करने लगती है। लेकिन हर पति के पास इतना पैसा नहीं होता कि वह अपनी पत्नी की किसी भी मांग को तुरंत ही पूरा कर दे। ऐसे में अगर वह अपनी पत्नी से कहता है कि कुछ समय रुक जाओ मैं तुम्हें बाद में वह चीज दिला दूंगा। लेकिन पत्नी अपने पति की इस मजबूरी को समझती नहीं और मुंह बनाकर बैठ जाती है। लेकिन यह बात बिल्कुल ठीक नहीं है। बढ़ती महंगाई के दौर में आज पतियों के पास इतना पैसा नहीं बच पाता कि वह अपनी पत्नी की सारी मांगों को पूरा कर सके। वैसे भी जिंदगी में सुख आता है तो जल्दी ही चला भी जाता है लेकिन दुख आता है तो वह बहुत ही मुश्किल से जाता है। हर पत्नी को अपने पति का सुख-दुख में पूरा सहयोग करना चाहिए। वैसे भी पतियों की आदत होती है कि अगर उनके पास पैसा है तो वह उसे अपनी पत्नी और बच्चों पर खर्च करने में हिचकता नहीं है। हर पति की यह दिली ख्वाहिश होती है कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को हर सुख दे। इसलिए पत्नियों को भी पति की मजबूरी को समझना चाहिए।
पति के घर लौटते ही समस्याओं की झड़ी लगा देना-
बहुत की पत्नियों की आदत होती है कि जैसे ही रात को उनका पति थका-हारा काम पर से लौटता है वैसे ही पत्नी उसके सामने पूरे दिन की समस्याएं लेकर बैठ जाती है। एक तो पति वैसे ही पूरे दिन के काम आदि के कारण थका हुआ होता है और उस पर अपनी पत्नी से दुनिया भर की परेशानियां सुनकर और दुखी हो जाती है। कुछ ही दिनों में पति अपनी पत्नी की इस आदत से इतना दुखी हो जाता है कि उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन पैदा हो जाता है।
हर पत्नी को इस बारे में पूरा ध्यान रखना चाहिए कि पति के काम से घर आते ही किसी तरह की परेशानी आदि लेकर न बैठे। बात अगर बहुत जरूरी हो तो पति को पहले खाना आदि खिला दें और उसके बाद जब सही समय लगे तो बता दें। इसके अलावा पति के काम से घर आते ही हल्की-फुल्की या प्यार भरी बाते करके उसके दिमाग की थकान को दूर करना चाहिए। मानसिक थकान दूर होते ही शारीरिक थकान अपने आप ही मिट जाती है। इसलिए हर पत्नी को अपनी ऐसी आदतों को बदलना चाहिए।
शारीरिक संबंध बनाने से पहले खुद पर ध्यान दें-
बहुत से विद्वानों का मानना है कि पुरुष को आंतरिक शक्ति या ऊर्जा बेडरूम से ही प्राप्त होती है और यह ऊर्जा समाप्त भी बेडरूम में ही होती है। बहुत सी स्त्रियों की एक आदत होती है कि वह शादी के कुछ ही समय के बाद शारीरिक संबंधों के प्रति लापरवाह नजर आने लगती हैं। इसके साथ ही वह अपने शरीर के साथ अपने पहनावे को लेकर भी लापरवाह हो जाती हैं। व्यक्ति के पहनावे से ही उसके व्यक्तित्व का पता चलता है। अगर साधारण कपड़ों को अच्छी तरह से धोकर और प्रेस करके पहने जाए तो वह साधारण इंसान को भी खूबसूरत बना देते हैं। इसके विपरीत अगर महंगे से महंगे और खूबसूरत कपड़ों को भी अगर बेढंगे तरीके से पहना जाए तो वह सुंदर इंसान को भी बदसूरत बना देते हैं।
पत्नियों के खुद के रखरखाव तथा पहनावे का शारीरिक संबंधों में बहुत ज्यादा महत्व होता है। स्त्री को पूरे दिन बहुत से काम करने पड़ते हैं जैसे- सुबह के समय चाय-नाश्ता तैयार करना, बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजना, पति के कपड़े आदि तैयार कराना, खाना बनाना, कपड़े धोना आदि। ऐसे में शरीर की अवस्था और पहनावा दोनों ही प्रभावित होते हैं। काम करते समय शरीर से निकलने वाला पसीना और धूल-मिट्टी कपड़ों में घुस जाती है। बहुत सी स्त्रियां तो घर में रहते हुए 2-3 दिन में कपड़े बदलती हैं। दिन में तो कैसे भी कपड़े चल जाते हैं लेकिन कुछ स्त्रियां तो उन्हीं कपड़ों को पहनकर बैडरूम में सोने के लिए चली जाती हैं। ऐसे में जब पति पत्नी को आलिंगन में लेकर संभोग क्रिया की शुरुआत करने वाला होता है तभी उसके कपड़ों से आने वाली बदबू पति की काम उत्तेजना को उड़ा देती है। ऐसी स्त्रियों के कपड़ों के अलावा शरीर से भी बदबू आने लगती है। ऐसे में शारीरिक संबंधों में एकाकार कैसे हो सकते हैं जो स्त्रियां शादी होने के बाद अपना शारीरिक आकर्षण खोती जा रही हैं या अपना तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं उनके लिए कुछ बातें जरूरी हैं-
• अपने शरीर की सुंदरता का पूरा-पूरा ध्यान रखें। अगर आपको लग रहा है कि आपके शरीर में मोटापा बढ़ रहा है तो इसको कंट्रोल करने के लिए तुरंत अपने रोजाना करने वाले भोजन और व्यायाम पर ध्यान दें। मोटापा स्त्री की सुंदरता के लिए अभिशाप होता है। इसकी वजह से दूसरे कई रोग भी पैदा हो सकते हैं जैसे- रक्तचाप, मधुमेह (डायबटीज), गठिया का दर्द, दिल के रोग आदि।
• शरीर की स्वच्छता को बनाकर रखें। रोजाना स्नान करने की आदत डालें। रात को बेडरूम में जाने से पहले दिन में पहने हुए कपड़े बदल लेने चाहिए।
• रात को पहने जाने वाले कपड़े पति की पसंद के ही होने चाहिए। बहुत से पतियों को रात के समय अपनी पत्नी सफेद जालीदार नाइटी और उसके नीचे काली ब्रा में अच्छी लगती है। बहुत से पुरुषों को नाइटी और उसके नीचे के कपड़ों का रंग अलग-अलग अच्छा लगता है। ऐसा माना जाता है कि पति रात के समय अपनी पत्नी को जिन कपड़ों में देखना चाहता है और वह उन्हीं में मिल जाती है तो इससे पति की काम-उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
• पलंग पर बिछाने वाली चादर को सप्ताह में 1-2 बार जरूर बदल लेना चाहिए।
• खिड़कियों पर ऐसे पर्दे लगाने चाहिए जो कि उत्तेजना को बढ़ाने वाले हो। चाहे तो इस बारे में अपने पति से भी राय ली जा सकती है।
सब पत्नियों के लिए-
आज के आधुनिक युग में हर लड़की सपनों की दुनिया में जीती है। शादी के बारे में भी हर लड़की के कई सपने होते हैं जैसे कि उसका होने वाला पति कोई राजकुमार जैसा होगा, उसका बहुत बड़ा घर होगा, बहुत बड़ी गाड़ी होगी आदि। वैसे तो सपना देखना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन बहुत सी लड़कियां इन सपनों को ही अपना जीवन बना लेती हैं और कुछ भी करके अपने इन सपनों को पूरा करने की कोशिश में लगी रहती हैं।
कहते हैं कि जो सपने देखता है वहीं उन सपनों को पूरा भी करने की ताकत रखता है। यह सही है कि सपने देखो और उन्हें पूरा करने की कोशिश करो। लेकिन ऐसे सपने मत देखो कि जिन्हें पूरा करने के लिए अपना बहुत कुछ दाव पर लगाना पड़े।
ससुराल में जाने के बाद हर स्त्री का सपना होना चाहिए कि वह अपने पति और ससुराल वालों को खुश रखे। उसके घर में सुख-शांति बनी रहे। जिंदगी में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए। यह ऐसे सपने होते हैं जिनके नतीजे ज्यादातर सकारात्मक होते हैं। ऐसे सपनों को पूरा करने में अगर स्त्री अपनी पूरी जिंदगी भी कोशिश करते रहे तो यह उसके लिए कोई घाटे वाला सौदा साबित नहीं होता। परिवार की सुख-शांति के लिए हर पत्नी को अपने पति के साथ पूरा सहयोगात्मक रुख अपनाकर चलना चाहिए। घर की सुख-शांति के लिए देखे गए सपने में अगर उसे अपने पति की मदद भी लेनी पड़े तो कोई बुरी बात नहीं है। चाहे तो पूरा परिवार ही स्त्री के इस सपने को पूरा करने में सहयोग दे सकता है। अगर स्त्री का यह सपना पूरा हो जाता है तो उसे लगता है कि उसका जीवन सफल हो गया।

रजोनिवृत्ति
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परिचयः-
जिस प्रकार से युवावस्था शुरू होने पर स्त्री को मासिकधर्म आने लगता है, ठीक उसी प्रकार से वृद्धावस्था शुरू होने पर यह आना बंद हो जाता है। यह अधिकतर स्त्रियों में 42 वर्ष से 50 वर्ष के समय में होता है। अतः कहा जा सकता है कि लगभग 40 से ऊपर की आयु को पार कर चुकी स्त्रियों को जब मासिकधर्म आना बंद हो जाता है तो उसे ही रजोनिवृत्ति कहा जाता है।
यह समय आना स्त्रियों में स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन कभी-कभी इसमें इतने अधिक शारीरिक उलट-फेर होते हैं हुए देखे गये हैं कि इसको बहुत सी स्त्रियां बीमारी भी समझने लगती हैं। वैसे यह समय जब स्त्री में आ जाता है तो यह समझना चाहिए कि अब वह गर्भधारण और बच्चा पैदा करने के योग्य नहीं रही है।
रजोनिवृत्ति का शरीर पर प्रभाव-
इस समय में स्त्रियों के यौनांगों के आकार-प्रकार पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से स्त्रियों की डिम्ब ग्रंथियां धीरे-धीरे मुरझाकर सिकुड़ जाती हैं। गर्भाशय का मुख भी सिकुड़कर एक प्रकार से सूख जाता है। इस समय से योनिमार्ग भी मुरझाकर इतना अधिक सिकुड़ जाता है कि उसका कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता है और ठीक इसी प्रकार से योनिद्वार भी सिकुड़कर छोटा हो जाता है। भगोष्ठों पर भी झुर्रिया आ जाती हैं। इस समय में स्त्रियों के स्तन के आस-पास की चर्बी भी कम हो जाती है और उनके आकार छोटे पड़ जाते हैं। स्तनों की त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। इसके अलावा शरीर के कई और भागों में भी कुछ परिवर्तन होने लगता है। इन सब परिवर्तनों के कारण से स्त्रियों के शरीर की कई ग्रंथियों के स्राव में बदलाव आ जाता है जिसके कारण से स्त्री को सेक्स क्रिया करने की इच्छा समाप्त हो जाती है।
रजोनिवृत्ति के लक्षण-
यह एक प्रकार की स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब यह समय स्त्रियों में आ जाता है तो उसमें कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं- मासिक-स्राव धीरे-धीरे आना बंद हो जाता है और फिर कभी भी नहीं आता, इस समय में स्त्री को कोई भी परेशानी नहीं होती लेकिन फिर भी बहुत सी स्त्रियां अपने आप को रोगी समझने की भूल कर बैठती हैं।
रजोनिवृत्ति के समय में स्त्रियों में कुछ प्रमुख लक्षण दिखाई पड़ते हैं-
• शरीर से पसीना आना।
• दिल की धड़कन बढ़ जाना तथा घबराहट होना।
• सिर में दर्द तथा चक्कर आना।
• चेहरा लाल तथा गर्म महसूस होना।
• स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना।
• शारीरिक कमजोरी अधिक महसूस होने लगना।
• हमेशा उदासीपन छाई रहना।
• पेट से संबंधित समस्या होना।
• पाचनशक्ति कमजोर पड़ जाना।
• मुंह का स्वाद बिगड़ा लगना तथा जी मिचलाना और उल्टियां आना।
• कब्ज की समस्या होना।
• इस प्रकार के लक्षण होने के साथ-साथ धीरे-धीरे मासिकस्राव बंद हो जाना।
• किसी-किसी अपवाद के रूप में स्त्री को इस समय में गर्दन में दर्द होते हुए देखा गया है।
• किसी-किसी स्त्रियों के हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं और किसी को कमर तथा जोड़ों में दर्द होने लगता है।
• इस समय में बहुत-सी स्त्रियों को मानसिक तनाव भी होने लगता है।
• कुछ स्त्रियों को तो इस समय के बाद शरीर पर चर्बियां पड़ने लगती हैं।
• कुछ स्त्रियों में तो यह भी देखा गया है कि मासिकधर्म दो से चार या छः महीने बंद रहने के बाद फिर होने लगता है और अधिक मात्रा में होता है तथा धीरे-धीरे बंद हो जाता है। यदि इस प्रकार के लक्षण स्त्रियों में हैं तो उसके गर्भाशय में कैंसर होने का डर लगा रहता है।
सेक्स में समय का महत्व
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सेक्स कब और कितने दिनों पर करें-
आमतौर पर यह सवाल सभी के मन में उठता है कि महीने में सेक्स कितनी बार करना चाहिए। कुछ लोग सेक्स को प्रतिदिन किए जाने वाला कार्य समझते हैं। सेक्स के प्रति इस तरह की भावना रखने वाले व्यक्ति मूर्ख और नादान होते हैं जो यह नहीं समझ पाते हैं कि कोई भी वस्तु कितनी भी अच्छी क्यों न हो, जरूरत से अधिक उपयोग करने पर हानि ही पहुंचाती है। इसी तरह सेक्स की भी अपनी एक स्थित और समय होता है। आयुर्वेद के अनुसार जो पुरुष स्त्री के साथ संयम और नियम से सेक्स करता है, वह जल्दी बूढ़ा नहीं होता। सेक्स और शरीर विशेषज्ञों का कहना है कि स्त्री-पुरुष दोनों को अपनी स्वास्थ्य क्षमता और शारीरिक शक्ति के अनुसार ही सेक्स करना चाहिए।
‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ जैसे स्वास्थ्य ग्रंथों में सेक्स के बारे में अलग-अलग ऋतु में समय और अंतर की बाते लिखी गई हैं। इन ग्रंथों में लिखा है कि व्यक्ति को कितने दिन सेक्स करना चाहिए, सेक्स की उत्तेजना किस मौसम में अधिक होती है, अलग-अलग अंतराल पर सेक्स क्यों करना आवश्यक है तथा विपरीत मौसम में अधिक सेक्स करने से क्या हानि हो सकती है।
हरहराचार्य द्वारा रचित ‘शांगंधर दीपिका’ नामक कामशास्त्र में लिखा कि अलग-अलग दिनों में स्त्री के अलग-अलग अंगों में सेक्स की उत्तेजना अधिक रहती है। यदि उन दिनों स्त्री के उन अंगों से छोड़छाड़ किया जाए तो वह जल्द ही उत्तेजित हो जाती है। हरहराचार्य लिखते हैं कि मासिकस्राव से पहले और बाद में स्त्री के अलग-अलग अंगों में उत्तेजना होती है। मासिकधर्म के बाद जो 15 दिन हों उसे शुक्ल पक्ष और पहले 15 दिन को कृष्ण पक्ष कहा जाता है।
मासिकस्राव से पहले और बाद में स्त्री के अलग-अलग उत्तेजित होने वाले अंगः-

तिथि मासिकस्राव से पहले (कृष्ण पक्ष) मासिकस्राव के बाद (शुक्ल पक्ष) तिथि मासिकस्राव से पहले (कृष्ण पक्ष) मासिकस्राव के बाद (शुक्ल पक्ष)
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आंखें
होंठ
गाल
गर्दन
कांख
स्तन
हृदय अंगूठा
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टखना
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योनि
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कमर
योनि
जांघ
टखना
पैर
अंगूठा स्तन
कांख
गर्दन
गाल
होंठ
आंखें
मस्तक

सेक्स के बारे में महत्वपूर्ण बातें-
• हमेशा दिन में सेक्स संबंध बनाने से बचना चाहिए। रात को ही सेक्स करना चाहिए क्योंकि रात को सेक्स करने से सेक्स का पूर्ण आनन्द मिलता है।
• खाना खाने के तुरंत बाद सेक्स नहीं करना चाहिए। इससे पाचन तंत्र खराब होता है। खाना खाने के लगभग तीन-चार घंटे बाद ही सेक्स करना चाहिए।
• आधी रात को किया गया सेक्स काफी आनंददायक होता है। सूर्य निकलने से कुछ समय पहले सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि यह शारीरिक व मानसिक दोनों ही तरह से काफी नुकसानदायक होता है।
• भूख, प्यास तथा अधिक भोजन आदि की स्थिति सेक्स संबंधों के लिए बहुत हानिकारक होती है।
• अधिक उतावलापन, बेचैनी तथा अधीरता में सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए। इससे सेक्स का आनन्द नहीं मिलता है और साथ ही मानसिक तनाव बढ़ जाता है।
• पानी के भीतर, शौचालय, कार के भीतर, गुफा, खुले मैदान, चौराहे, झाड़ियों की आड़ आदि स्थानों पर सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए।
• एक से अधिक स्त्री के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे रोग हो सकता है।
• यदि सेक्स के बाद लिंग पर किसी प्रकार के चिह्न या घाव आदि दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
• अधिक सेक्स कभी नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
• वेश्या, कॉलगर्ल एवं पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए। इससे सेक्स रोग हो सकता है।
‘सुश्रुत संहिता’ और ‘चरक संहिता’ के अनुसार किस ऋतु में कितनी बार सेक्स करना चाहिएः

ऋतु शिशिर बसंत ग्रीष्म वर्षा शरद हेमंत
महीने दिसम्बर-जनवरी फरवरी-मार्च अप्रैल-मई जून-जुलाई अगस्त-सितंबर अक्टूबर-नवंबर
सेक्स कितने दिनों के अंतर पर करना चाहिए 3 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
इच्छानुसार (कृष्ण पक्ष.) 3 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
3 दिनों के अंतर पर (कृष्ण पक्ष.) 15 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
15 दिनों के अंतर पर (कृष्ण पक्ष.) 3 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
15 दिनों के अंतर पर (कृष्ण पक्ष.) 3 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
3 दिनों के अंतर पर (कृष्ण पक्ष.) 3 दिनों के अंतर पर (शुक्ल पक्ष.)
इच्छानुसार (कृष्ण पक्ष.)
सेक्स की उत्तेजना सबसे अधिक कब होती है रात्रि में (शुक्ल पक्ष.)

रात्रि में (कृष्ण पक्ष.)
दिन-रात कभी भी (शुक्ल पक्ष.)
दिन-रात कभी भी (कृष्ण पक्ष.) रात्रि में (शुक्ल पक्ष.)

दिन में (कृष्ण पक्ष.)
हल्के वर्षा के समय (शुक्ल पक्ष.)
बादलों की गरज के समय (कृष्ण पक्ष.) रात्रि में (शुक्ल पक्ष.)

रात्रि में (कृष्ण पक्ष.)
रात्रि में (शुक्ल पक्ष.)

रात्रि में (कृष्ण पक्ष.)

स्थान सेक्स बंद कमरे में जहां अधिक ठंड हो वहां करना चाहिए। जंगल में बने घर में सेक्स करना चाहिए। जहां मौसम न अधिक गर्म हो और न अधिक ठंड हो वहां सेक्स करना चाहिए। समान्य से थोड़े कम तापमान वाले स्थान पर सेक्स करना चाहिए। जहां जहां मौसम न अधिक गर्म हो और न अधिक ठंड हो वहां सेक्स करना चाहिए। हेमंत के मौसम में गर्म कमरे में सेक्स करना चा

सेक्स में नयापन
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परिचय-
सेक्स क्रिया में आनन्द और संतुष्टि पाने के लिए सेक्स संबंधों में नयापन लाना आवश्यक होता है। एक ही तरीके से सेक्स संबंध बनाने से यह सेक्स संबंध उबाऊं, बोरिंग और सुस्त लगने लगता है। जब सेक्स संबंधों में कोई नयापन नहीं होता है तो पति-पत्नी एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं।
सेक्स संबंधों में आनन्द और संतुष्टि न मिलने से पति-पत्नी के बीच एक दीवार सी बनने लगती है जिसका प्रभाव वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। सेक्स संबंधों में आनन्द न मिलने से पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होने से दोनों दुखी रहने लगते हैं जिससे सेक्स की इच्छा में कमी आने लगती है। इस तरह के कारणों से पति-पत्नी अलग रहने लगते हैं या उनका जीवन कष्टमय हो जाता है। अतः जीवन में उत्पन्न इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए सेक्स संबंधों में नयापन लाना बेहद आवश्यक है।
सेक्स संबंधों में नयापनः
एक-दूसरे के प्रति प्यार को बढ़ावा देना-
युवक-युवतियों की जब शादी होती है तो शादी के कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहता है। पति-पत्नी के बीच संबंध अच्छे रहते हैं लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाता है वैसे-वैसे काम व अन्य कारणों से पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ती जाती हैं जिससे उन्हें आपस में प्यार करने का मौका ही नहीं मिलता और उनके बीच सेक्स संबंधों में भी खटास बढ़ने लगता है। वैवाहिक जीवन में उत्पन्न इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक है कि पति-पत्नी आपस में बात करने के लिए समय निकालें। एक-दूसरे से अच्छी बाते करें और एक-दूसरे की बातों को सुने। दोनों ही एक-दूसरे का सम्मान करें और सेक्स संबंध के नए तरीकों को अपनाएं।
एक-दूसरे के बीच अच्छे संबंध के लिए उपहारः
वैवाहिक जीवन को आनन्दित व सुखी बनाने के लिए आवश्यक है कि पति-पत्नी समय-समय पर एक-दूसरे को उपहार दिया करें। यह आवश्यक नहीं है कि उपहार के लिए कोई खास मौका ही हो। इस तरह एक-दूसरे को उपहार देने से वैवाहिक जीवन में संतुलन बना रहता है और एक-दूसरे के प्रति प्यार बढ़ता है।
सेक्स संबंधों में नयापन के लिए कपड़ों की अदला-बदलीः
वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार का कोई विवाद एवं असंतुष्टि पैदा न हो, इसलिए जब भी मौका मिले अपनी पत्नी की सुन्दरता, उसके कपड़े और बातों की तारीफ करना चाहिए। इस तरह पत्नी को भी पति की तारीफ करनी चाहिए। एक-दूसरे की तारीफ करने से सेक्स संबंधों में नवीनता आती है। सेक्स संबंधों में नवीनता के लिए चाहिए कि बेडरूम वे एक-दूसरे के कपड़े पहने तथा अलग-अलग तरीके से एक-दूसरे को खुश करने की कोशिश करें।
बच्चों जैसी हरकते करनाः
सेक्स संबंधों में नवीनता लाने के लिए पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी के सामने बच्चों की तरह व्यवहार करे और घुटने के बल चले। पति-पत्नी दोनों के एक-दूसरे के अंगों के साथ छेड़छाड़ करना चाहिए। पत्नी को चाहिए कि पति को घोड़ा बनने के लिए कहें और उस पर सवार हो जाए। बेडरूम में जाते समय दोनों को आवाज निकालना चाहिए। पत्नी को चाहिए कि पत्नि के स्तनों को स्पर्श करे तथा चूसे। इस तरह की हरकते करने से पत्नी के मन में प्यार और उत्तेजना बढ़ने लगती है जिससे सेक्स क्रिया में बेहद आनन्द मिलता है।
बार-बार हनीमून मनानाः
सेक्स संबंधों के प्रति हमेशा उत्साह और चाह बनाए रखने के लिए पति-पत्नी को चाहिए कि वे हर साल कहीं न कहीं घूमने के लिए जाएं। घूमने के लिए आप हनीमून के लिए जहां गए थे वहां जा सकते हैं या किसी नई जगह और होटल भी चुन सकते हैं। इस तरह जब आप घूमने जाएं तो एक-दूसरे को पहली हनीमून पर किए गए कार्य और बातों को याद कराएं। इस तरह बाहर घूमने और अपनी हनीमून के बारे में बात करने से सेक्स संबंधों की याददाश्त ताजा हो जाती है और सेक्स क्रिया में नयापन महसूस होता है।
प्यार भरी बातेः
शादी के बाद पति-पत्नी दोनों के बीच एक समस्या रहती है वे एक-दूसरे को किस नाम से बुलाएं। आमतौर पर लोग अपनी पत्नी को सामान्य नाम से पुकारतें हैं जैसे- एजी, ओजी आदि। इसके अतिरिक्त कुछ लोग अपनी पत्नी को उसके मायके के नाम से भी पुकारते हैं। लेकिन पति-पत्नी के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि वे दोनों एक-दूसरे को पुकारने के लिए अच्छे नाम रखें और उसी नाम से उसे पुकारें। इससे एक-दूसरे के प्रति प्यार बढ़ता है।
मीठी बाते करनाः
पति-पत्नी को आपसी संबंधों को सही बनाए रखने के लिए कभी-कभी एक साथ बैठकर अपने विवाह के फोटो एलबम या वीडियो रिकॉडिंग देखना चाहि्ए। विवाह के समय किए गए कार्यों को याद करना चाहिए, पहली बार मिलने पर किए गए बातों को याद करना चाहिए, सुहागरात के समय की गयी सेक्सी बातों व घटनाओं को एक-दूसरे को सुनाएं। इस तरह पुरानी बातों और घटनाओं को याद करने से पति-पत्नी के बीच नजदीकियां बढ़ती है जिससे सेक्स संबंधों में नयापन आता है।
सेक्स संबंधी अंगों का नाम रखनाः
स्त्री-पुरुष चाहे तो वे सेक्स संबंधी अंगों को नाम दे सकते हैं लेकिन इन नामों को केवल बेडरुम में ही उपयोग करना चाहिए। स्तनों, लिंग और योनि का नाम रख सकते हैं। इस तरह इन अंगों के नाम रखने से सेक्स क्रिया बेहद रोमांचित और आनन्दित होता है।
सेक्स क्रिया के समय बाते करनाः
सेक्स संबंध बनाने से पहले स्त्री को पुरुष के लिंग को सहलाना चाहिए और उससे बाते करनी चाहिए। इस क्रिया में इस तरह बाते करनी चाहिए जैसे कोई किसी व्यक्ति से बाते करता है। इस तरह पुरुष को भी स्त्री की योनि और स्तनों से बाते करनी चाहिए। इस तरह दोनों को एक-दूसरे के अंगों से बाते करनी चाहिए। इससे सेक्स क्रिया में बेहद उत्तेजना पैदा होती है जिससे सेक्स का भरपूर आनन्द मिलता है।
सेक्स क्रिया से पहले का खेलः
सेक्स संबंध बनाने से पहले पति-पत्नी को चाहिए कि वे आपस में कोई भी खेल-खेले। पति-पत्नी दोनों को ही एक-दूसरे के अंगों को सहलाना और छूना चाहिए। इस तरह एक-दूसरे के अंगों से खेलने से दोनों के अन्दर कामुक उत्तेजना उत्पन्न होगी। इस प्रकार कामुक उत्तेजना पैदा होने के बाद सेक्स करने से सेक्स में नयापन के साथ-साथ आनन्द भी मिलता है।
आंखों-आंखों में बाते करनाः
पति-पत्नी को सेक्स संबंधों को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे से आंखों ही आंखों में बाते करते हुए रात को सेक्स क्रिया के लिए प्रोग्राम बनाना चाहिए। इस तरह मुंह से बिना कुछ बोले इशारों से सेक्स की बाते करने और सेक्स के लिए एक-दूसरे को उत्तेजित करने से सेक्स क्रिया का आनन्द और सुख और बढ़ जाता है।
नए तरीके से सेक्स की पहल करनाः
सेक्स संबंध बनाने के लिए हमेशा नए-नए तरीके का उपयोग करना चाहिए क्योंकि एक ही तरीके से सेक्स करने से सेक्स के दौरान वह आनन्द नहीं मिलता जो मिलना चाहिए। सेक्स संबंध बनाने से पहले एक-दूसरे की तारीफ करनी चाहिए। पुरुष को स्त्री से सेक्स संबंधित बाते करनी चाहिए, उसकी बालों, आंखों और उसकी खूबसूरती की तारीफ करनी चाहिए। सेक्स संबंधी कोई घटना सुनाएं, उसके शरीर व कामुक अंगों को सहलाएं। इससे स्त्री और पुरुष दोनों में सेक्स के प्रति उत्तेजना बनी रहती है और सेक्स से दोनों को पूर्ण आनन्द मिलता है। पति-पत्नी दोनों को ही सेक्स संबंधों के लिए नये तरीकों का उपयोग करना चाहिए। हमेशा सेक्स के नये तरीके का उपयोग करने से सेक्स का आनन्द बना रहता है।
शादी की सालगिरह मनानाः
वैवाहिक जीवन सुखमय बनाने और सेक्स के रोमांच को कायम रखने के लिए शादी की सालगिरह मनानी चाहिए। शादी की सालगिरह मनाने से पति-पत्नी दोनों की पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। दोनों के अन्दर की भावनाएं जागृत हो जाती हैं और हनीमून की याद ताजा हो जाती है। सालगिरह पर रोमांटिक जगहों पर घूमने जाना चाहिए और रोमांटिक बातें करनी चाहिए।
गिफ्ट देनाः
वैवाहिक जीवन में एक-दूसरे को खुश रखने के क्रम में गिफ्ट का भी बेहद महत्व है। स्त्री-पुरुष दोनों को ही एक-दूसरे को गिफ्ट देना चाहिए। इससे एक-दूसरे के लिए मन में प्यार बढ़ता है और आपसी संबंध ठीक रहते हैं। पति को चाहिए कि गिफ्ट देने से पहले वह चोरी-छिपे यह जानने की कोशिश करे कि गिफ्ट में क्या दे जो उसे पसंद हो। इस तरह पत्नी को भी पति के खुश करने के लिए गिफ्ट देना चाहिए। इससे दोनों का मन प्रसन्न रहता है जिसके कारण सेक्स संबंध में बेहद आनन्द और सुख मिलता है।
सेक्स के लिए आसनों का उपयोग करनाः
सेक्स क्रिया में आसन का बेहद महत्व है। एक ही तरीके और एक ही आसन में सेक्स करने से पति-पत्नी को सेक्स से शारीरिक व मानसिक सुख नहीं मिल पाता जो उसे सेक्स से मिलना चाहिए। ऐसे में सेक्स का भरपूर आनन्द प्राप्त करने के लिए हमेशा नए-नए आसनों का उपयोग करना चाहिए। अलग-अलग आसनों में सेक्स करने से सेक्स का पूर्ण आनन्द मिलता है। सेक्स में आनन्द के लिए कभी भी ऐसे आसनों का प्रयोग न करें जिससे स्त्री को कष्ट हो क्योंकि ऐसे आसनों में सेक्स करने से न ही आनन्द मिलता है और न ही संतुष्टि। ऐसे कष्टकारी आसनों में सेक्स करने से स्त्री रोगग्रस्त भी हो सकती है। अतः अलग-अलग आसनों में सेक्स करें लेकिन कठिन आसनों में कभी भी सेक्स न करें।

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