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योगासन का SEX स्वास्थ्य से संबंध क्या है, जानिए पुरुषो की सेक्स पॉवर बढाने के आसन

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शारीरिक स्वास्थ्य में योग का बहुत ही महत्व माना जाता है। योगासन करने से शरीर के साथ ही मन भी स्वस्थ रहता है। इसके अलावा योगासन करने से शरीर की सारी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
योगासन को इस समय सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ही काफी महत्व दिया जा रहा है। बाहर के देशों से आकर बहुत से लोग भारत में योग की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा बाहर के देशों से बहुत से लोग आकर डांस की प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। भारतीय डांस को योगासनों की ही तरह शरीर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। डांस की अलग-अलग मुद्राऐं योगासनों के ही अलग-अलग रूप होते हैं।

शीर्षासन-

शीर्षासन करने की विधि-

शीर्षासन करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथों के पंजों को आपस में गूंथकर अंजुलि सी बना लें। अंजुलि को जमीन पर बिछे आसन पर रखें और फिर उस पर अपने सिर को इस तरह रखें कि आपके सिर का बीच वाला भाग उस पर टिक जाए। इसके बाद धीरे-धीरे सिर के बल खड़े होने की कोशिश करें। अब कमर तक सीधे हो जाएं और फिर धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करते हुए दोनों टांगों को सीधा कर लें।
शीर्षासन करने से लाभ-
शीर्षासन करने से दिमाग तेज होता है और वीर्य पुष्ट होता है। जो पुरुष शीघ्रपतन और स्वप्नदोष रोग से ग्रस्त होते हैं उनके लिए शीर्षासन करना बहुत ही लाभदायक रहता है।

शीर्षासन करने में सावधानी-

• शीर्षासन को शुरूआत में सिर्फ आधे मिनट तक करना ही अच्छा रहता है। इसके बाद धीरे-धीरे इसको करने का समय बढ़ाते हुए संभोग क्रिया से 5 से 7 मिनट तक कर लेना चाहिए।
• अगर शीर्षासन करने वाले व्यक्ति की इस आसन को करते समय दिल की धड़कन तेज हो जाती हो, सिर में दर्द होने लगता हो, दिमाग तेज होने लगता है तो उसे इस आसन को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पुराने जुकाम या कब्ज से ग्रस्त रोगियों को भी इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए।

भुजंगासन-

भुजंगासन करने की विधि-

भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को शरीर के दाएं-बाएं कंधों के नीचे इस प्रकार रखें कि हाथ की उंगलियां और अंगूठे आपस में मिल जाएं। अब हाथ की हथेलियों की जमीन पर रखें और पैर के पंजों को पीछे की ओर तान दें। इसके बाद हाथ के तालु पर दबाव देकर सांस को अंदर भरकर छाती को ऊपर उठाते चले जाएं। इससे नाभि के ऊपर का भाग उठ जाएगा। फिर सांस को बाहर की ओर छोड़ते हुए वापिस पहले वाली स्थिति में आ जाएं।

भुजंगासन करने से लाभ-

भुजंगासन को करने से बाहें मजबूत होती हैं जिससे संभोग क्रिया के समय पुरुष को जल्दी थकान नहीं होती है। इस आसन को करने से बाहर निकला हुआ पेट कम हो जाता है।

यानासन-

यानासन करने की विधि-

यानासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर किसी दरी आदि को बिछा लें। इसके बाद इस पर पेट के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को मिलाकर रख लें। इसके बाद सांस को अंदर भरकर अपने सिर, छाती और टांगों को जमीन पर रखकर सांस को बाहर छोड़ दें और गर्दन को मोड़कर जमीन पर रखकर शरीर को ढीला छोड़ दें।

यानासन करने से लाभ-

पुरुषों के लिए यानासन को संभोग क्रिया के लिए बहुत ही अच्छा आसन माना जाता है। यह आसन पुरुषों में सेक्स के बहुत सारे गुण पैदा करता है जो स्त्री की संतुष्टि के लिए जरूरी होते हैं।

सुप्त वज्रासन-

सुप्त वज्रासन करने की विधि-

सुप्त वज्रासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी टांगों को मोड़कर जमीन पर रख लें। लेकिन ध्यान रहें कि दोनों टांगों के बीच में एक फुट की दूरी रखनी चाहिए। इसके बाद पीछे की ओर झुककर कमर के बल लेट जाएं। अब अपनी कमर को जमीन से ऊपर उठाकर सिर को कमर की जितना मोड़ सकें उतना मोड़ लें। फिर अपने दोनों हाथों को दोनों टांगों पर रख लें। अब सांस लें तथा छोड़ दें। असली स्थिति में आने के लिए सबसे पहले गर्दन को धीरे-धीरे सीधी करके बैठें। इसके बाद टांगों को खोलकर शरीर को ढीला छोड़ दें और लेट जाएं।

सुप्त वज्रासन करने से लाभ-

सुप्त वज्रासन सेक्स करने वाले पुरुषों के लिए बहुत ही लाभकारी रहता है। इस आसन को करने से घुटने और टांगें ज्यादा मजबूत बनती हैं जिससे पुरुष संभोग क्रिया के समय अधिक समय तक बिना किसी परेशानी के इस क्रिया को कर सकता है। इसके अलावा इस आसन को करने वाले पुरुषों का लिंग भी मजबूत बनता है।

शुतुरमुर्गासन-

शुतुरमुर्गासन करने की विधि-

शुतुरमुर्गासन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खडे़ हो जाएं। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद पैरों की एड़ियों को उठाकर पैर के पंजों तथा हाथ की हथेलियों को जमीन से उठाकर सिर्फ उंगलियों को खोलकर जमीन से लगाकर रखें। अपने पूरे शरीर को पैर और हाथ की उंगलियों के आधार पर रखें। अंत में हाथों को जमीन पर रखकर धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठें।

शुतुरमुर्गासन करने से लाभ-

पुरुषों में शुतुरमुर्गासन को करने से हाथों के बल रहकर ज्यादा देर तक संभोग करने की शक्ति पैदा होती है और लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराने में भी आसानी होती है।

महावीरासन-

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं। फिर एक पैर को लगभग 3 फुट के करीब आगे की ओर ले जाएं। इसके बाद दोनों हाथों की मुट्ठियों को बंद करके ऊपर उठा लें और आगे-पीछे कूदते हुए पैरों को बदलते रहें। इस समय मुंह बंद होना चाहिए और सांस लेने की क्रिया नाक से करनी चाहिए। इस क्रिया को करते समय शरीर को तान लें और रुकने पर ढीला छोड़ दें।

लाभकारी-

महावीरासन को करने से पुरुषों के शरीर में ताकत पैदा होती है जिससे संभोग क्रिया के समय वह बिना थके संभोग कर सकता है।

पद्मासन-

पद्मासन करने की विधि-

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर आसन लगाकर बैठ जाएं। अपनी दाईं टांग को मोड़कर बाईं जांघ पर और बाएं पैर को दाईं जांघ पर इस प्रकार रख लें जिससे की दोनों पैरों की हड्डियां नाभि के दोनों ओर पेट से लगी हुई हो। इसके बाद दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। अपनी कमर, छाती और सिर समेत पूरे शरीर को सीधा रखें। आपके दोनों पैरों के घुटने जमीन पर लगे हुए होने चाहिए। इस समय अपनी आंखों को साधारण रूप से बंद रखना चाहिए।

पद्मासन को करने से लाभ-

इस आसन को करने से पुरुषों का शीघ्रपतन का रोग जल्दी दूर हो जाता है। इसके अलावा यह आसन स्वप्नदोष और प्रमेह आदि रोगों में भी अच्छा रहता है।

सिद्धासन-

सिद्धासन करने की विधि-

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बिल्कुल सीधा बैठ जाएं। इसके बाद अपने बाएं पैर की एड़ी को अंडकोष और गुदा के बीच में लगा लें और दाएं पैर की एड़ी को लिंग तथा नाभि के बीच में लगा लें। इस समय तक दोनों पैरों की एड़िया एक-दूसरे के ऊपर आ जानी चाहिए और घुटने जमीन पर लगे होने चाहिए। इस आसन को करते समय रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधी रखें और हाथों को घुटनों पर रखें।

सिद्धासन को करने से लाभ-

इस आसन को करने से पुरुषों के अंडकोष और लिंग मजबूत बनते हैं। इसके अलावा यह आसन स्वप्नदोष, प्रमेह और शीघ्रपतन जैसे रोगों को दूर करता है और वीर्य को मजबूत बनाता है।

 

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