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शीघ्रपतन को रोकने के लिए योग की मुद्राएं: Yoga to stop premature ejaculation shighrapatan in hindi

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सर्वंगासन (Sarvangaasana or shoulder stand)

यह उन थाइरोइड ग्रंथियों (thyroid glands) को सुचारू रूप से चलाने में सहायता करती है, जो शरीर की हर क्रिया के लिये काफी ज़रूरी होते हैं। इस आसन की सबसे अच्छी बात यह है कि यह एड्रेनल (adrenal) ग्रंथियों को मजबूती प्रदान करता है तथा टेस्टिस (testis) की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता में निखार आता है।

  • एक चटाई पर पैर फैलाकर लेट जाएं।
  • घुटनों को मोड़कर या सीधे ही पैरों को धीरे धीरे उठाएं।
  • अपनी हथेलियों को पीठ और कूल्हों के पास रखें और पैर की उँगलियों को ऊपर की ओर करते हुए शरीर को ऊपर उठाएं। आपका वज़न आपके कन्धों पर होना चाहिए। धीरे धीरे सांस लें और अपनी ठुड्डी को अपनी छाती पर रखें। आपकी कोहनियाँ फर्श को छूनी चाहिए तथा आपकी पीठ को भी सहारा मिलना चाहिए।
  • इस मुद्रा को जितनी देर हो सके बनाकर रखें तथा शुरूआती मुद्रा में धीरे धीरे लौट जाएं। इस समय लेट ना जाएं क्योंकि इससे आपकी पीठ तथा कन्धों को चोट पहुँच सकती है।

पश्चिमोतासन (Paschimotasana)

यह शीघ्रपतन रोकने के सबसे अच्छे आसनों में से एक है। इससे आपके शुक्राणु और भी शक्तिशाली बनते हैं। इससे मेटाबोलिज्म (metabolism) में भी वृद्धि होती है।

  • सीधे बैठें और फिर ऐसे लेटें कि आपके पैर की उंगलियाँ ऊपर की ओर हों।
  • सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। सांस छोड़ें और रीढ़ को सीधा रखते हुए अपने पैर की उँगलियों की ओर झुकें।
  • पैर के अंगूठे को तर्जनी और अंगूठे से पकड़ें और ऐसा करते हुए सांस लेते रहें।
  • अब सांस छोड़ें और धीरे धीरे अपने घुटनों की ओर झुकें। ध्यान रखें कि आपकी कोहनियाँ फर्श को ना छुएं।
  • इस मुद्रा में कम से कम 15 से 20 सेकंड तक रहें और सांस रोके रखें। अब धीरे धीरे सांस लेते हुए बैठने की मुद्रा में आ जाएं। अच्छे परिणामों के लिए इस आसन को 5 से 6 बार दोहराएं।
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